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मैंने खुद को इस नजर से देखा है


बेटी


कुमारी तानिया

चोरसौगरुड़

बागेश्वरउत्तराखंड

मैंने खुद को इस नजर से देखा है


उसको भी जीने का हक था।

जिसके आने से पहले ही कर दी विदाई।।

उसकी तो कोई गलती नहीं थी।

जो इस संसार को ही न देख पाई।।

उसने भी पाए थे मां- बाप और भाई।

मगर इस संसार में ही वो न आ पाई।।

तुम्हारी तरह उसे भी भेजा था ईश्वर ने।

फिर क्यूं तुमने उससे पीछा छुड़ाई।।

जब सामने तुम्हारे थी वो आई।

इसलिए उसकी कर दी दुनिया से विदाई।।

चरखा फीचर

मैंने खुद को इस नजर से देखा है


मंजू धपोला

कपकोटबागेश्वर

उत्तराखंड


मैंने खुद को इस नजर से देखा है।

जिस नजर से दुनिया को मुझे अक्सर नजरअंदाज करते देखा है।।

मैं खुद की नजर  से नजर मिला सकूंबस इतना खुद को तराशा है।

मझधार में डूब ना जाए यह नजरखुद से मंजिल तक पहुंचने का वादा है।।

बस खुद से इस दुनिया की नजर में खास बनने का इरादा है।

सुनना चाहती हूं दुनिया से “क्या खुद को तराशा है"।।

कोयला हूं दुनिया की नजर में अभीचमकता हीरा बनने का इरादा है।

अभी उलझने हैं जीवन में कईक्षितिज छूकर दिखाऊंयह खुद से वादा है।।

जैसे मैं एक परिंदा हूं शिकार की तलाश मेंएक खूबसूरत आशियाने की फिराक में।

एक खूबसूरत तारों की महफिल सजीउस महफिल की चांद बनना चाहती हूं मैं।।

अभी नजर में नहीं किसी के मैंएक दिन बनना चाहे मेरे जैसा कोई।

होना चाहती हूं सबके लिए खास मैं।

जहां से छू सकूं चांद कोजाना चाहता हूं उसके इतने पास मैं।।

 

चरखा फीचर

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